Wednesday, June 3, 2009

किस राह चलूँ ...? ?

एक नवयुवक जिसके सीने में गरम खून है तो हांथों में लाल गुलाब भी हैवो उबल भी सकता है और साथ में पिघल भी सकता हैसमाज में फैली लाचारी को देखकर वो उसका नाश करना चाहता है पर अपनी प्रेमिका के प्रेम में आकर्षित भी है.... पर अभी वह अपनी राह चुनने में समर्थ नही हो पाया है ..........




नवजात कली सा खिलूँ यहाँ या सूखी डाल म्रणाल बनूँ ?
पैरों में बंधन बाँध चलूँ या पक्षी बन आजाद फिरून ?
बन वीर प्रतापी राज करूँ या प्रेम गली की राह चलूँ ?
तीखी धार कृपाण चलूँ या माया मोह मैं जाल फंसूं ?
भावना ह्रदय में बहने दूँ या कामना ह्रदय की आज सुनूँ ?
उबले भावों का स्वाद चखूँ या प्रेम सुधारस पान करूँ ?
किस डगर चलूँ किस मोड़ मुडून किस राह में करता आह फिरून ?
सीने में रक्त उबाल चलूँ या प्रेम सरोवर डूब चलूँ
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1 comment:

  1. kis raah chaloon? yeh prashna sabke saamne aata hai is umar me....and only you can tell yourself the answer! kavita achhee likhi hai:)

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