Monday, May 11, 2009

..मुश्किलें

मुश्किलें , मुश्किलें ।।

सफर दर सफर कितनी हैं मुश्किलें ,
मिट गईं एक तो दूसरी हैं मिलें ,
मुश्किलें , मुश्किलें ।।

ऐसी हैं मुश्किलें ऐसे हैं ये गिले ,
हँसी और होंठ को जैसे कोई सिले ,
मुश्किलें , मुश्किलें ।।

इतनी हैं आफतें कुछ कह सकें ,
मुश्किलों के दलदल में हम धंसते चलें ,
मुश्किलें , मुश्किलें ।।

खड़े हैं चारों तरफ़ ज़ख्मों के किले ,
कुछ नए हैं मिले कुछ पुराने छिले ,
मुश्किलें , मुश्किलें ।।

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