Monday, May 11, 2009

स्वर्गभूमि

शीश हिमगिरि से सुशोभित,
चरण हिंद पखारता
मोती सम गंगा का जल,
भारत भूमि संवारता।।

जिस स्वर्गभूमि की रजकण से,
हम भारतवासी धन्य हुए
है नमन शत शत उस भारत को,
जिस मातृभूमि पर हम जन्म लिए।।

जब किरण पहुँचती धरती पर,
पुष्पों का डेरा लगता है
उस वीरभूमि के आँगन में,
वीरों का मेला लगता है।।

है वर्तमान तक अतीत से,
भारत की जय-जयकार हुई
भारत को खंडित करने की,
शक्ति बुरी लाचार हुई।।

No comments:

Post a Comment