यूँ अनजाने में बढ़ जाती हैं ख्वाहिशें,
जन्म लेती हैं तमन्नाएँ अचानक नई,
सभी ख्वाहिशों को मंजिल नहीं मिलती,
सभी तमन्नाओं को जिंदगी नहीं मिलती। ।
मुकम्मल जहाँ हो सबका ये जरूरी नहीं ,
जरूरी नहीं की फूल राहों में हों ।
कुछ मंजिल देखकर चलते हैं ,
कुछ को मंजिल खींच लाती है ।
सबकी मंजिल कहीं तो है ,
कहीं से तो आवाजें आ रही हैं...............
Subscribe to:
Post Comments (Atom)


No comments:
Post a Comment