Monday, May 11, 2009

फिर से वो यादें आज आंखों पर छा गईं....

वो चेहरे वो बातें क्यूँ भूलती नहीं ,
क्यूँ जिंदगी मेरी आगे बढती नही
इक बारिश में की prayer याद गई ,
फिर से वो यादें आज आंखों पर छा गईं । ।

कभी पढने कभी प्रैक्टिकल करने गए ,
कभी शोर्ट attendance पूरी करने गए
proxy में yes mam की आवाज याद गई ,
फिर से वो यादें आज आंखों पर छा गईं । ।

कभी इन्तजार किसी के आने का किया ,
कभी wait lunch का कभी छुट्टी का किया
छुट्टी में बजी घंटी की आवाज याद गई ,
फिर से वो यादें आज आंखों पर छा गईं । ।

वो english में सोना वो bonding समझना ,
वो mixture में चार - पाँच acids का मिलाना
आज hooting की फिर से आवाज याद गई ,
फिर से वो यादें आज आंखों पर छा गईं । ।

वो सीढ़ी पे बैठना वो ग्राउंड में खेलना ,
वो बंक मारना वो पेपर में जागना
टीचर के आने की आहट आज गई ,
फिर से वो यादें आज आंखों पर छा गईं । ।

2 comments:

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  2. Hi Atul,
    It's nice to see your blog. Whatever you have written it shows that you have a nice heart.Everybody doesn't feel this.
    BEST OF LUCK
    keep writing......

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